क्योटो : जापान के क्योटो शहर में जुलाई का पूरा महीना एक अनोखी सांस्कृतिक छटा से भर जाता है, जब दुनिया के प्रसिद्ध त्योहारों में शामिल गियोन मात्सुरी का आयोजन होता है। यह ऐतिहासिक उत्सव यासाका श्राइन के आसपास मनाया जाता है और इसकी शुरुआत वर्ष 869 में महामारी और प्राकृतिक आपदाओं से मुक्ति की प्रार्थना के रूप में हुई थी।
1100 वर्षों से अधिक पुराना यह त्योहार आज जापान की परंपरा, कला और सामुदायिक भावना का प्रतीक बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी खासियत लकड़ी से बनी विशाल और कलात्मक ‘यामाबोको’ झांकियां हैं, जिन्हें कुशल कारीगर पारंपरिक तकनीकों से तैयार करते हैं। इन भव्य रथों को जुलाई में सड़कों पर निकाले जाने वाले जुलूसों में शामिल किया जाता है, जो हजारों पर्यटकों और स्थानीय लोगों को आकर्षित करते हैं।
गियोन मात्सुरी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जापान की सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव है। इस दौरान क्योटो की गलियां पारंपरिक संगीत, नृत्य, रोशनी, स्थानीय व्यंजनों और रंग-बिरंगे मेलों से जीवंत हो उठती हैं। लोग पारंपरिक युकाता पहनकर उत्सव में भाग लेते हैं। यह त्योहार जापान की उस विरासत को दर्शाता है, जहां सदियों पुरानी परंपराएं आधुनिक समय में भी लोगों को जोड़ने का माध्यम बनी हुई हैं। गियोन मात्सुरी आज भी क्योटो की पहचान और जापानी संस्कृति के गौरव का प्रतीक है।

Author: Goa Samachar
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