

रिपोर्टर : रोशनी राामदास वर्णेकर
कुंडई, फोंडा: भगवान विठ्ठल के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का अनोखा दृश्य इन दिनों देखने को मिल रहा है। शनिवार, 10 जुलाई को कुंडई, फोंडा से बड़ी संख्या में वारकरी गोवा से महाराष्ट्र स्थित पंढरपुर की ओर पैदल यात्रा पर निकल पड़े हैं। इस वारी में कई श्रद्धालु शामिल हैं, जो भक्ति और सेवा भावना के साथ यह लंबा सफर तय कर रहे हैं।
इस वारी में श्री संत सोहिरोबानाथ वारकरी संप्रदाय का रथ भी शामिल है, जिसमें भगवान श्री विठ्ठल और माता रुक्मिणी की सुंदर प्रतिमाएं विराजमान हैं। रथ के साथ चलते हुए वारकरी हाथों में मंजिरी लेकर अभंगों का मधुर गायन करते हुए पंढरपुर की ओर बढ़ रहे हैं। उनके मुख पर “ज्ञानोबा-तुकाराम” और “विठ्ठल-विठ्ठल” का जयघोष गूंज रहा है। भक्ति, सेवा और समर्पण से ओत-प्रोत यह यात्रा हर श्रद्धालु के मन को भावविभोर कर देती है।


गोवा से महाराष्ट्र तक का यह सफर आसान नहीं है। रास्ते में बारिश और कभी-कभी तेज धूप जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए भी वारकरियों के कदम नहीं रुक रहे हैं। उनके मन में केवल भगवान विठ्ठल के दर्शन की इच्छा और भक्ति की भावना है।
वारी के दौरान वारकरी एक-दूसरे की सेवा और सहायता करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। उनके चेहरे पर थकान के साथ-साथ भगवान के प्रति विश्वास और उत्साह साफ दिखाई देते हैं। यह यात्रा केवल पैदल चलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समर्पण, सेवा और आध्यात्मिक भावनाओं का संगम देखने को मिलता है।

देवशयनी आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर पंढरपुर में भगवान विठ्ठल के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। 25 जुलाई को मनाई जाने वाली आषाढ़ी एकादशी तक वारकरी इस भक्ति मार्ग को पूरा करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
बारिश की बूंदें हों या धूप की तपिश, वारकरियों की श्रद्धा और भक्ति उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है। गोवा से पंढरपुर तक की यह वारी आस्था, सेवा और समर्पण की एक प्रेरणादायक मिसाल बन रही है।
Author: Goa Samachar
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