समावेशी दिव्यांगता पर स्पॉटलाइट कार्यशाला का आयोजन

गोवा समाचार ब्यूरो
नई दिल्ली: राइजिंग फ्लेम ने, भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, गोवा राज्य दिव्यांगजन आयुक्त का कार्यालय, संयुक्त राष्ट्र भारत और यूएन वीमेन के सहयोग से स्पॉटलाइट नामक मीडिया सेंसिटाइजेशन कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला सोमवार, 22 सितंबर 2025 को आयोजित हुई, जिसमें 50 पत्रकारों, संपादकों, मीडिया और संचार पेशेवरों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य समाचार कक्षों और देशभर की मीडिया कथाओं में दिव्यांगता को लेकर समावेशी और अंतरसंबंधी (intersectional) रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करना था।

कार्यशाला का पहला सत्र “दिव्यांगता-समावेशी और अंतरसंबंधी मीडिया प्रतिनिधित्व और रिपोर्टिंग” राइजिंग फ्लेम द्वारा संचालित किया गया। इसमें यह चर्चा हुई कि किस प्रकार भाषा और समाचार की प्रस्तुति समाज के व्यापक दृष्टिकोण को प्रभावित करती है। इस सत्र ने संवाद खोला कि समाचारों को किस तरह से गढ़ा जाए ताकि दिव्यांगजनों के विविध अनुभवों को सामने लाया जा सके और सही व सम्मानजनक रिपोर्टिंग की संस्कृति विकसित हो।
राइजिंग फ्लेम की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक निधि गोयल, जिन्होंने इस सत्र का सह-निर्देशन किया, ने कहा:
“अक्सर मीडिया हमें दिव्यांगजनों को या तो नायक के रूप में या दया की वस्तु के रूप में पेश करता है। हमें इन दोनों से आगे बढ़ना होगा। हमें दिव्यांग आवाज़ों को मुखर करना है और संवेदनशील, मानव-केंद्रित कहानियाँ बनानी हैं। मीडिया जनमानस की समझ और नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाता है। पत्रकार सुनिश्चित कर सकते हैं कि दिव्यांगता पर रिपोर्टिंग सटीकता, गरिमा और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण से हो।”
कार्यशाला का दूसरा सत्र “जेंडर और दिव्यांगता पर रिपोर्टिंग के अनुभव साझा करना” यूएन वीमेन द्वारा आयोजित किया गया। इसकी मॉडरेटर रही सुदेशना मुखर्जी, हेड ऑफ कम्युनिकेशंस, यूएन वीमेन इंडिया। पैनल में वरिष्ठ पत्रकार और संचार विशेषज्ञ शामिल हुए।
उज़मी अतर, चीफ़ करेस्पॉन्डेंट, पीटीआई , परविंदर सिंह, हेड ऑफ कम्युनिकेशंस, वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम इंडिया ,पूजा पांडे, पूर्व सह-सीईओ, चंबल मीडिया, लेखिका ,भानुप्रिया राव, संस्थापक, बहनबॉक्स ,पैनलिस्ट्स ने दिव्यांगता पर रिपोर्टिंग के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता को केवल एक “बीट” की तरह न देखा जाए, बल्कि स्वास्थ्य या अन्य सामाजिक मुद्दों की तरह इसे भी एक केंद्रीय और महत्वपूर्ण विषय माना जाए।
उज़मी अतर ने कहा: “जब हम प्राकृतिक आपदाओं की बात करते हैं, तो हमें इसमें यह शामिल करना चाहिए कि दिव्यांगजन किस प्रकार प्रभावित होते हैं। जब हम यह लिखते हैं कि कोई व्यक्ति कठिनाइयों को पार कर मतदान केंद्र पहुँचा, तो हमें यह सवाल करना चाहिए कि उसे मतदान करने के लिए उन ‘कठिनाइयों’ का सामना क्यों करना पड़ा?”
Author: Goa Samachar
GOA SAMACHAR (Newspaper in Rajbhasha ) is completely run by a team of woman and exemplifies Atamanirbhar Bharat, Swayampurna Goa and women-led development.














