

पणजी: गोवा विधानसभा के सदस्य, गोविंद गौडे और उल्हास तुएनकर ने हाल ही में तिरुवनंतपुरम, केरल में केरल विधानसभा परिसर में आयोजित संसद और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की ‘लोक लेखा समितियों’ (Public Accounts Committees – PACs) के अध्यक्षों के सम्मेलन में भाग लिया।
लोक सभा सचिवालय द्वारा केरल विधानसभा सचिवालय के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में संसद और विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (PACs) के अध्यक्ष एक साथ आए। इसका उद्देश्य विधायी निगरानी, वित्तीय जवाबदेही और लोक प्रशासन में पारदर्शिता को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना था। यह सम्मेलन ‘ऑडिट, जवाबदेही और सुशासन – लोक लेखा समिति की बदलती भूमिका’ (Audit, Accountability and Good Governance – The Evolving Role of the Public Accounts Committee) नामक मुख्य विषय पर केंद्रित था।
इस अवसर पर, विधायक गोविंद गौडे ने अपने संबोधन में लोक लेखा समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये समितियां सार्वजनिक धन के उपयोग में जवाबदेही सुनिश्चित करने, पारदर्शिता को बढ़ावा देने और सुशासन स्थापित करने में अहम योगदान देती हैं। श्री गौडे ने जोर देकर कहा कि लोक लेखा समिति विधायी वित्तीय निगरानी के सबसे महत्वपूर्ण साधनों में से एक है। ऑडिट रिपोर्टों की जांच और सरकारी खर्चों की सूक्ष्म समीक्षा के माध्यम से, यह समिति सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग समझदारी से, कुशलतापूर्वक और वित्तीय औचित्य के सिद्धांतों के अनुरूप किया जाए।
विधानसभा सदस्य गौडे ने लोक लेखा समितियों की कार्यप्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके लिए उन्होंने ऑडिट टिप्पणियों की समय पर जांच, सिफारिशों पर प्रभावी अनुवर्ती कार्रवाई (follow-up), और विधायिका, कार्यपालिका तथा ऑडिट संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की बात कही। उन्होंने कहा कि लोक लेखा समितियों (PACs) का काम केवल वित्तीय अनियमितताओं की पहचान करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें प्रशासनिक दक्षता में सुधार लाने, कमियों को दोबारा होने से रोकने और सार्वजनिक सेवाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
सम्मेलन में हुई चर्चाओं ने अनुभवों के आदान-प्रदान, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने और संसदीय तथा विधायी वित्तीय निगरानी के समक्ष आ रही नई चुनौतियों पर विचार करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। गोवा के विधायकों की इस भागीदारी से लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने और शासन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही के सिद्धांतों को बनाए रखने के प्रति गोवा विधानसभा की प्रतिबद्धता झलकती है। यह सम्मेलन इस बात पर जोर देते हुए संपन्न हुआ कि विधायी निगरानी को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने में कि सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग नागरिकों के व्यापक हित में हो, लोक लेखा समितियों की भूमिका लगातार विकसित हो रही है और रचनात्मक है।
Author: Goa Samachar
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