GCCI जुटाएगा CSR फंड, चार नेस्टिंग बीच पर रात की गश्त बढ़ेगी; घोस्ट नेट हटाने के लिए राज्यव्यापी अभियान
पणजी: गोवा में ओलिव रिडले समुद्री कछुओं के संरक्षण को मजबूत करने के लिए उद्योग जगत भी भागीदारी निभाएगा। गोवा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (GCCI) ने इस दिशा में उद्योगों से CSR और CER निधि जुटाने का आश्वासन दिया है। साथ ही, समुद्र तटों और मछली पकड़ने वाली जेटियों से पुराने व छोड़े गए मछली पकड़ने के जाल हटाने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाया जाएगा।
ये निर्णय पणजी के आल्तिन्हो स्थित वन भवन में समुद्री कछुआ संरक्षण के लिए गठित राज्य समन्वय समिति की समीक्षा बैठक में लिए गए। बैठक की अध्यक्षता मुख्य वन्यजीव वार्डन एवं अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक के. रमेश कुमार, आईएफएस ने की। इसमें GCCI के महानिदेशक संजय आमोनकर के अलावा वन, मत्स्य, पर्यटन, पर्यावरण और उद्योग विभागों, तटीय पुलिस, भारतीय तटरक्षक बल, गोवा तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण तथा गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
‘स्वच्छ समुद्र तट, सुरक्षित कछुआ’ पर जोर
GCCI के महानिदेशक संजय आमोनकर ने बताया कि चैंबर संरक्षण अभियान के लिए उद्योगों को एकजुट करने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा। GCCI अध्यक्ष प्रतिमा धोंड ने इसे प्रमुख CSR परियोजना बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके लिए उद्योग निदेशालय, व्यापार एवं वाणिज्य विभाग के सहयोग से CSR और CER निधि जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वच्छ समुद्र तट और सुरक्षित समुद्री जीव गोवा की पर्यावरणीय पहचान तथा पर्यटन छवि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
चार समुद्र तटों पर बढ़ेगी निगरानी
गोवा में ओलिव रिडले कछुओं के अंडे देने के लिए मोरजिम, मांद्रेम, आगोंदा और गलजीबाग को अधिसूचित किया गया है। इनमें मोरजिम और गलजीबाग कछुआ संरक्षण रिजर्व हैं। अंडे देने के मौसम के दौरान अक्टूबर से मई तक इन चारों समुद्र तटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। तटीय पुलिस रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक गश्त बढ़ाएगी।
समुद्र में छोड़े गए पुराने जाल, जिन्हें ‘घोस्ट नेट’ कहा जाता है, कछुओं और अन्य समुद्री जीवों के लिए गंभीर खतरा हैं। इन्हें समुद्र तटों, नदियों के मुहानों और ट्रॉलरों से एकत्र कर गोवा वेस्ट मैनेजमेंट कॉरपोरेशन तथा अधिकृत रिसाइक्लिंग एजेंसियों के जरिए पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाएगा। मत्स्य विभाग राज्य की सभी सात मछली पकड़ने वाली जेटियों पर जाल संग्रहण बिन लगाएगा।
ट्रॉलरों में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TED) के शत-प्रतिशत इस्तेमाल को भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। यह उपकरण जाल में फंसे कछुओं को बाहर निकलने का रास्ता देता है। बैठक में इसके लिए न्यूनतम 35 × 12 सेंटीमीटर के निकास द्वार का उल्लेख किया गया।
मत्स्य विभाग और संरक्षण संगठनों की सराहना
समिति ने मत्स्य विभाग, विशेषकर निदेशक डॉ. शमीला मोंटेइरो के प्रयासों की सराहना की। विभाग ने पारंपरिक मछुआरों, ट्रॉलर संचालकों और संरक्षण एजेंसियों के बीच समन्वय बनाने के साथ-साथ मछुआरों को TED के इस्तेमाल, घायल कछुओं की सूचना देने और संयुक्त गश्त में सहयोग के लिए जागरूक किया है।
समिति ने कहा कि संरक्षण उपायों की सफलता के लिए मछुआरा समुदाय की भागीदारी जरूरी है। इस अवसर पर ReefWatch Marine Conservation और TREE (Trust for Research, Education & Environment) के कार्यों की भी प्रशंसा की गई। दोनों संगठन एक दशक से अधिक समय से घोंसलों की निगरानी, हैचरी प्रबंधन, टैगिंग और सामुदायिक जागरूकता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत एसओपी
मुख्य वन्यजीव वार्डन के. रमेश कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल 2025 को सभी तटीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में समुद्री कछुआ संरक्षण के लिए राज्य समन्वय समितियां गठित करने तथा राज्य-विशिष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया था।
एसओपी में कछुओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों—ट्रॉल जालों में फंसना, अन्य मछली पकड़ने वाले जालों में उलझना, अंडों का अवैध शिकार, कृत्रिम रोशनी से नवजात कछुओं की मृत्यु और घोंसले बनाने वाले प्राकृतिक स्थलों का नुकसान—को ध्यान में रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2025 को नोडल एजेंसी और राज्यों से छह-माही रिपोर्टिंग की व्यवस्था पर भी निर्देश दिए थे। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रधान पीठ ने 17 फरवरी 2026 को इन निर्देशों के अनुपालन पर फिर जोर दिया। गोवा की एसओपी इसी प्रक्रिया के तहत अधिसूचित की गई है।
हेल्पलाइन और जागरूकता अभियान का प्रस्ताव
चारों नेस्टिंग बीच पर बहुभाषी सूचना-पट्ट लगाए जाएंगे, जिनमें पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश होंगे। घोंसलों, अंडों के अवैध शिकार और घायल कछुओं की सूचना देने के लिए एक साझा हेल्पलाइन स्थापित करने तथा घायल कछुओं की देखभाल संबंधी एसओपी पोस्टर जारी करने का भी प्रस्ताव है।
इसके अलावा, 16 जून को विश्व समुद्री कछुआ दिवस मनाने के लिए समुद्र तटों की सफाई, रेत पर कलाकृतियां बनाने और विद्यार्थियों की प्रतियोगिताएं आयोजित करने पर विचार किया गया।
बैठक के अंत में के. रमेश कुमार ने सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने दायित्वों के तहत की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। समिति ने स्पष्ट किया कि समुद्री कछुओं के संरक्षण के लिए सरकारी विभागों, उद्योग जगत, मछुआरों और पर्यावरण संगठनों के बीच समन्वय निर्णायक होगा।
Author: Goa Samachar
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