गाँव की रसोई से आधुनिक किचन तक: 9वें गोवा कलिनरी एंड हॉस्पिटैलिटी कॉन्क्लेव में पाक विरासत पर चर्चा

गाँव की रसोई से आधुनिक किचन तक: 9वें गोवा कलिनरी एंड हॉस्पिटैलिटी कॉन्क्लेव में पाक विरासत पर चर्चा

उतोरदा : गोवा की समृद्ध पाक परंपरा, हॉस्पिटैलिटी उद्योग के बदलते स्वरूप और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित 9वें गोवा कलिनरी एंड हॉस्पिटैलिटी कॉन्क्लेव 2026 में देशभर के कलिनरी और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने विचारों का आदान-प्रदान किया। दक्षिण गोवा के उतोरदा स्थित पांच सितारा होटल प्लैनेट हॉलीवुड बीच रिसोर्ट गोवा में दिनभर चलने वाले इस कार्यक्रम में देश के अलग अलग हिस्सों से आये लोगों ने भाग लिया|

ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।

ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास

गोवा कलिनरी क्लब की पहचान

ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।

ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।

कॉन्क्लेव में गोवा के शेफ, हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स और फूड इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों ने विरासत, क्षेत्रीय व्यंजन, फूड एंड बेवरेज, सोशल मीडिया, ग्रामीण रसोई और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के भविष्य जैसे विषयों पर चर्चा की। आयोजन का उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना नहीं, बल्कि उद्योग के सामने मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद और सहयोग का मंच तैयार करना भी रहा।

ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।

कॉन्क्लेव की एक महत्वपूर्ण चर्चा का केंद्र यह सवाल रहा कि क्या गाँव की रसोई को हमारी कलिनरी विरासत का हिस्सा माना जाना चाहिए?

इस सवाल ने पारंपरिक भारतीय खान-पान और बदलती आधुनिक रसोई के बीच संबंधों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। कर्नाटक के पारंपरिक ‘नाटी’ भोजन से लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में समान सामग्री से विकसित हुई विशिष्ट खान-पान की शैलियों तक, विशेषज्ञों ने भारतीय भोजन की विविधता और उसकी जड़ों पर बात की।

ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।

शेफ दयानंद रामकृष्णन और शेफ मंजीत सिंह रट्टू ने अदिति मल्होत्रा के साथ पारंपरिक खाना पकाने की विधियों, क्षेत्रीय प्रभावों और पीढ़ियों से चली आ रही रेसिपी पर विचार साझा किए। चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पारंपरिक भोजन शैली को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे आधुनिक रसोई और बदलते स्वाद के अनुरूप किस तरह प्रस्तुत किया जा सकता है।

ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।

दादी-नानी की रसोई में छिपी विरासत

विशेषज्ञों के अनुसार, पाक विरासत केवल शाही व्यंजनों, प्रसिद्ध रेस्तरां या लिखित रेसिपी तक सीमित नहीं है। कई बार किसी क्षेत्र की असली पहचान गाँव की साधारण रसोई, दादी-नानी की पाक कला, स्थानीय मसालों और पीढ़ियों से मौखिक रूप से आगे बढ़ती आ रही विधियों में सुरक्षित रहती है।

इसी संदर्भ में यह सवाल भी सामने आया कि इन पारंपरिक ज्ञान और ग्रामीण पाक शैलियों को संरक्षित करने के लिए क्या पर्याप्त प्रयास किए जा रहे हैं। कॉन्क्लेव में चर्चा का माहौल गंभीर विषयों के बावजूद संवादात्मक और जीवंत रहा। विशेषज्ञों के बीच अनुभवों के साथ हास्य और अनौपचारिक बातचीत ने कार्यक्रम को और रोचक बनाया। 9वां गोवा कलिनरी एंड हॉस्पिटैलिटी कॉन्क्लेव 2026 इस मायने में एक ऐसा मंच बनकर सामने आया, जहाँ उद्योग से जुड़े लोगों ने नई जानकारी हासिल करने के साथ-साथ सामूहिक चुनौतियों, बदलती उपभोक्ता पसंद और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के भविष्य पर भी विचार किया।

 

ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।

छत्रपति शिवाजी महाराज के पूर्वजों से जुड़ी रॉयल मराठा पाक विरासत की विशेषज्ञ सोनल नाइक निंबालकर माहुरकर ने कहा कि गोवा हमेशा से देश-विदेश के पर्यटकों की पसंदीदा मंज़िल रहा है। ऐसे में गोवा कलिनरी कॉन्क्लेव में अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित किया जाना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि वह अपनी यात्रा, अनुभवों और शाही मराठा खान-पान की समृद्ध परंपराओं को साझा करने के साथ-साथ देश के प्रतिष्ठित पाक विशेषज्ञों और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ संवाद को लेकर भी उत्साहित हैं।

पैनल चर्चाओं में गोवा के हॉस्पिटैलिटी, फूड, बेवरेज और बार इंडस्ट्री से जुड़े कई नामचीन विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। जैक सुखिजा (TTAG), गैबिन डेस (GTDC), रंजीत पांडे ,फिशरमैन व्हार्फ , सोनाली नाइक, शेफ़ हरीश, ब्रांड होसा , दिव्या कामत वी पी , कामत कंस्ट्रक्शंस & रिसॉर्ट्स और डीआरके वेंचर्स , वैभव गुप्ता ,जनरल मैनेजर , द एस्टर गोवा , सिड (The Big Fokers), हीना और जेसिका (Goa Served) सहित अन्य वक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुभवों के साथ चर्चाओं को समृद्ध किया।

पैनल में हॉस्पिटैलिटी स्पेस की सोच और डिज़ाइन से लेकर गोवा की कॉकटेल संस्कृति, स्थानीय स्पिरिट्स, फेनी और बदलते बेवरेज परिदृश्य तक कई महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर विचार-विमर्श हुआ।

ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।ओडेट मैस्करेनहास और जो मैस्करेनहास गोवा कलिनरी क्लब की पहचान ओडेट मैस्करेनहास को “गोवा की कलिनरी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। वह गोवा के खान-पान और पाक विरासत की गहरी जानकार होने के साथ-साथ लेखिका, टीवी होस्ट और फूड क्रिटिक भी हैं। गोवा की पारंपरिक पाक संस्कृति को संरक्षित और दुनिया के सामने लाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जो मैस्करेनहास, गोवा कलिनरी क्लब के को-फाउंडर हैं और संस्था के संचालन, विस्तार तथा भविष्य की रणनीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। दोनों की विशेषज्ञता और समर्पण ने गोवा कलिनरी क्लब को गोवा की पाक विरासत और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनाने में योगदान दिया है।

यह गोवा की समृद्ध संस्कृति, विरासत और पारंपरिक खान-पान को संरक्षित करने, संवारने और देश-दुनिया तक पहुँचाने की दिशा में एक सराहनीय एवं सार्थक पहल रही। (Image Courtesy: Social Media )


https://goatourism.gov.in/
EDC

 

 

Goa Samachar
Author: Goa Samachar

GOA SAMACHAR (Newspaper in Rajbhasha ) is completely run by a team of woman and exemplifies Atamanirbhar Bharat, Swayampurna Goa and women-led development.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

EDC

और पढ़ें

Majhe Ghar