जंगलों से हथियारी नक्सली तो मिट गए, लेकिन दिमागी नक्सलियों ने कई संगठनों पर कब्जा कर रखा है: प्रधानमंत्री

जंगलों से हथियारी नक्सली तो मिट गए, लेकिन दिमागी नक्सलियों ने कई संगठनों पर कब्जा कर रखा है:
प्रधानमंत्री

छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

 मेरे प्यारे देशवासियों,

आज पूरा देश दुनिया के कोने-कोने में करोड़ों भारतीय प्रकाश का पावन पर्व मना रहे हैं, दूर-दूर से लोग अपने घर पहुंच रहे हैं। परिवार और परिजनों के साथ मिलने-जुलने का एक बड़ा महोत्सव होता है, और मैं भी दिवाली मनाने आपके बीच पहुंच गया हूँ। सीमा पर और देश के भीतर, राष्ट्र की रक्षा करने वाले, राष्ट्र के प्रहरी, मॉं भारती के वीर, आप सब बेटे-बेटियां, आप सब मेरे परिजन हैं, आप सब मेरे परिवार का हिस्सा है। हिमालय की गोद में कारगिल से लेकर लेपचा तक, समंदर किनारे सरक्रीक से लेकर, समंदर की गोद में INS-विक्रांत तक, वीर जवानों के साथ हर दिवाली मेरे लिए यादगार रही है।

मेरे वीर जवानों,

इस बार मैं दिवाली मनाने बस्तर के जंगलों में आया हूँ, आप सबके बीच आया हूँ। ये वो भूमि है, जहां कभी नक्सली आतंक का कहर था और आप सबकी त्याग-तपस्या के कारण उसी भूमि पर आज नक्सली आतंक का कहर खत्म हुआ, विकास की बहार शुरू हो गई।

और साथियों,

साल 2026 की ये दिवाली वाकई विशेष है। 40-50 साल के बाद आपके लिए ऐसी दिवाली आई है।  ये पहली दीवाली है- जब देश नक्सलवाद-माओवादी आतंक के खिलाफ दशकों पुरानी लड़ाई जीत चुका है। ये पहली दीवाली है- जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है। ये पहली दीवाली है- जब करोड़ों देशवासी नक्सलवाद के भय को परास्त कर चुके हैं। ये एक असाधारण उपलब्धि है। इसका बहुत बड़ा श्रेय आपका है, आप जैसे लाखों वीरों का, जवानों का, बेटे-बेटियों का, सुरक्षा कर्मियों का  है। इसलिए, आज मैं आपके साथ दिवाली मनाने आया हूँ।। और, 140 करोड़ देशवासियों की ओर से आपके त्याग, समर्पण और सेवाभाव के प्रति आभार भी व्यक्त करने के लिए आया हूँ।

साथियों,

हमारे दूरदर्शी पूर्वजों ने कहा है- आभ्यन्तरं भयं रक्ष्यम्, असारं बाह्यतो भयम्। अर्थात्, जब राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तो बाहरी दुश्मन कुछ नहीं कर पाता है। लेकिन, अगर आंतरिक सुरक्षा कम पड़ती है, तो बाहरी दुश्मन भी सर उठाने लगते हैं। इसलिए, जो भूमिका सीमाओं पर हमारी सेनाओं की है, देश के भीतर वही रोल आप सब सुरक्षाबलों का है। आपने देश की एकता, अखंडता के लिए अनगिनत बलिदान दिये हैं, आपने असीम त्याग किया है। देश की आंतरिक सुरक्षा में लगे सुरक्षा बल, हमारे CRPF, कोबरा, BSF, ITBP, एक-एक जवान, SSB, IRB और राज्यों की पुलिस का एक-एक सिपाही, बस्तर फाइटर्स जैसे स्पेशल फोर्सेस के कमांडोज़, महिला फाइटर्स, ये देश आपकी सेवाओं के लिए, आपका ऋणी है। करोड़ों-करोड़ों देशवासी आप पर गर्व करते हैं। कृतज्ञता और अपनेपन के इसी भाव के साथ मैं आप सभी को, जो-जो, जहां-जहां डटे हैं, सबको दीपावली की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। मैं देश की सीमाओं पर राष्ट्र रक्षा के लिए तैनात हमारे सैनिकों को भी बधाई देता हूँ।

साथियों,

माओवादी आतंक-नक्सलवाद के खिलाफ ये लड़ाई आसान नहीं थी। एक समय था, जब देश के करीब 20 राज्यों में 230 से ज्यादा जिले नक्सलवाद की चपेट में थे, नक्सलवाद से प्रभावित थे। शाम होने के बाद यहां जीवन ठहर जाता था, घरों से बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता था। लोगों से उनका वोट डालने का अधिकार भी इन नक्सलियों ने छीन लिया था। बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा वामपंथी उग्रवाद की चपेट में था। हजारों गाँव, करोड़ों की आबादी, एक साल में दो-दो हजार तक नक्सली हमले, एक साल में दो हजार हमले। आप याद करिए, 2010 में, यहीं पास ही दंतेवाड़ा में नक्सलियों से मुठभेड़ में CRPF के हमारे 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। 2010 में ही, दंतेवाड़ा में ही एक और घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या हुई थी। ये धरती हमारे वीरों के रक्त से अभिषिक्त हो गई थी। लेकिन, महलों में रहने वाले किसी भी नामदार की सिसकी नहीं सुनाई दी। किसी भी महलों में रहने वाले नामदार की आंखों से एक बिंदु भी नहीं निकला था। आए दिन कहीं न कहीं ऐसे हमले होते रहते थे। दशकों तक ये सिलसिला चलता रहा, इस दौरान छत्तीसगढ़ में ही एक हजार से ज्यादा जवानों का बलिदान हुआ। IED के विस्फोटों में कितने ही जवानों को अपने हाथ-पैर गँवाने पड़े। आप 2004 से 2013 तक के आंकड़ें देखेंगे, तो हर साल जितने नक्सली मारे जाते थे, उससे ज्यादा संख्या में हमारे वीर जवान शहीद होते थे। नक्सली संगठनों के मुखिया इसे अपनी जीत समझते थे, जश्न मनाते थे। और दुर्भाग्य से तब की सरकारों द्वारा नक्सलवाद को लाइलाज बीमारी समझकर छोड़ दिया गया था। मेरे आदिवासी परिवारों को, उनके नसीब पर जीने के लिए छोड़ दिया गया था। और इसे स्वीकार कर लिया गया था कि ये तो बस ऐसे ही चलता रहेगा, गोलियां चलेगी, जवान मरेंगे, नागरिक पीटेंगे।

साथियों,

कोई भी देश अपने दुश्मनों के लिए – ऐसे ही चलता रहेगा – की अप्रोच से नहीं चलता। देश को आगे बढ़ाने के लिए, देश के दुश्मनों को बुलंद हौसले के साथ, एक रणनीति बनाकर कुचलना ही होता है। इसके लिए जिस राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी देश में थी, वो कमी साल 2014 में दूर हुई। आपने इस प्रधानसेवक को मॉं भारती की सेवा का मौका दिया। और हमने देखा है, 2014 के बाद हालात भी बदलने लगे और आंकड़ें भी बदलने लगे। हमारे यहां हमेशा नक्सलियों से ज्यादा संख्या में जवानों के मारे जाने की चर्चा रही। लेकिन 47 साल बाद, पहली बार ऐसा हुआ, जब पिछले एक वर्ष में CRPF के एक भी जवान को ड्यूटी के दौरान जान नहीं गंवानी पड़ी। ये देश की सही नीतियों और दृढ़ इच्छाशक्ति की जीत है। ये आपके, मैं फिर दोहराता हूँ, ये आपके शौर्य, साहस और संयम की जीत है।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

इन वीर जवानों की जय।

हमारे सुरक्षाबल और पुलिस के जवान विपरीत परिस्थितियों में भी डटे रहे। यह उस कर्तव्य परायणता की जीत है।

साथियों,

सफलता के लिए सही नियत और सही नीतियाँ आवश्यक हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमने एक के बाद एक कड़े निर्णय लिए। कई ऐसे कदम भी उठाए गए, जो आज तक लोगों की जानकारी में नहीं हैं। इन निर्णयों और प्रयासों से नक्सलवादियों, अलगाववादियों की फंडिंग पर बहुत बड़ी चोट की गई। फेक करेंसी के नेक्सस को तबाह किया गया। इससे उनकी आर्थिक कमर ही नहीं टूटी, बल्कि पूरी सप्लाई लाइन ही चोक हो गई। इससे हथियारों की सप्लाइ बंद हुई, नक्सलियों के मूवमेंट और रिक्रूटमेंट पर लगाम लगी।

साथियों,

पहले की सरकारों ने जमीन पर लड़ रहे सुरक्षाबलों के भी हाथ बांधकर रखे थे। नक्सली हमले होते जाते थे, लेकिन सुरक्षाबलों के पास खुलकर पलटवार करने की आज़ादी नहीं थी। हमने सिक्योरिटी  फोर्सेस को हर जरूरी निर्णय लेने की आज़ादी दी। पहले सरकार और सिस्टम में बैठे कुछ लोगों से वामपंथी उग्रवाद को जो सपोर्ट मिलता था, हमने उसे रोकने का भी काम किया।

साथियों,

हम एक बहुत बड़े लक्ष्य को लेकर चल रहे थे। हमारा लक्ष्य था- किसी माँ की गोद सूनी न हो, कोई परिवार तबाही के भंवर में न फंसे, कोई बच्चा हथियार उठाकर हिंसा की राह पर न निकले, किसी युवा का भविष्य बर्बाद ना हो। इसलिए, जब तक ये लक्ष्य पूरा नहीं हो गया, हम संकल्प के साथ लगातार लगे रहे। कोई प्रचार-प्रसार नहीं, कोई दिखावा नहीं, हमने संवेदनशीलता के साथ काम करते हुए माओवादी आतंक की कमर तोड़ दी। हमने सेवा भाव से नक्सल प्रभावित इलाकों में लोगों के जीवन को बदला। इसलिए, नक्सलवाद से पीड़ित लोग भी सरकार और सुरक्षाबलों के साथ मजबूती से खड़े हुये। आज यहां भी ऐसे नागरिक उपस्थित हैं, जिन्होंने इस बड़ी लड़ाई को जीतने में बहुत सहयोग किया है। मैं उन सबका भी आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

जब हम राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ काम करते हैं, तो देश की शांति और सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है, देश विकास की नई ऊंचाइयों को भी छूता है और हर गरीब वंचित की विकास में भागीदारी भी बढ़ती है। और इसलिए, बीते 12 वर्षों में देश ने नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ ही लड़ाई नहीं जीती है सिर्फ, बल्कि देश ने गरीबी के खिलाफ भी बड़ी जंग जीती है।

साथियों,

इस बार दीपावली के ठीक पहले एक ऐसी खबर आई है, जिसकी पूरे देश और दुनिया में चर्चा है। अभी कुछ दिन पहले वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में, बीते 12 वर्षों में 50 करोड़ लोग, 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर निकले हैं। जो काम दशकों तक गरीबी हटाओ के नारों से नहीं हुआ, केवल 12 वर्षों में वो देश ने करके दिखाया। आप कल्पना कीजिए, ये कितनी बड़ी उपलब्धि है। सोचिए, ये कैसे हुआ?

साथियों,

हम दीवाली में रंगोली बनाते हैं, पहले रंगोली की कुछ लाइनें बनाई जाती हैं, शुरुआती लाइनें और आकृतियाँ छोटी और अलग लगती हैं, लेकिन जैसे-जैसे छोटे-छोटे हिस्से रंगोली के एक साथ जुड़ते हैं, तो एक बड़ी सुंदर तस्वीर बन जाती है। बीते 12 वर्षों में, भारत में भी ऐसा ही हुआ है। हमने गरीब कल्याण की योजनाओं की ऐसी रंगोली बनाई, जो गरीब को सशक्त करती चली गई। जनधन योजना से करोड़ों लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े। पीएम आवास योजना से करोड़ों परिवारों को पक्की छत मिली। हमने मुद्रा योजना के तहत लोगों को बिना गारंटी का लोन दिया। स्वनिधि योजना के जरिए, रेहड़ी-पटरी वाले व्यापारियों को भी सहायता दी, उन्हें अपना व्यापार बढ़ाने के मौके मिल रहे हैं। हमने आयुष्मान भारत के तहत गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी। करोड़ों परिवारों को हर महीने मुफ्त राशन दिया। बच्चों की शिक्षा के लिए नीतियाँ बनाईं। यानी, हमने हर गरीब परिवार के लिए मुफ्त दवाई, मुफ्त पढ़ाई, मुफ्त रसोई, ये सुनिश्चित की। यही नहीं, स्वच्छ भारत मिशन और हर घर जल, जैसी योजनाओं ने जीवन की बुनियादी चिंताओं को भी दूर किया। इसी का परिणाम है कि आज करोड़ों लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। जिन परिवारों को पहले गरीबी विरासत में मिलती थी, उन्हें अब विरासत में एक बेहतर भविष्य की नींव मिल रही है। जिन गरीब परिवारों का पूरा जीवन सिर्फ चिंता में बीतता था, उन्हें अब सरकार का भरोसा मिला है, उनमें एक नया आत्मविश्वास आया है।

साथियों,

गरीबी के खिलाफ इस बड़ी विजय, एक बड़ा आधार नक्सलवाद-अलगाववाद के खिलाफ देश की लड़ाई से भी जुड़ा है। बस्तर के लोग और आप सब जानते हैं, जहां-जहां नक्सलियों का प्रभाव होता था, वहाँ उनका पहला एजेंडा होता था- विकास को रोकना, आम लोगों के जीवन पर चोट करना, बच्चों के लिए स्कूल नहीं खुलने दिये जाते थे, स्कूलों को आग लगा दी जाती थी। बीमारों के लिए हॉस्पिटल नहीं बनने दिये जाते थे, डॉक्टरों को घुसने नहीं दिया जाता था। जिंदगी बचाने के लिए मेडिकल स्टोर जैसी सुविधाएं नहीं होने देते थे। ये नक्सली हमारे बच्चों को पोलियो तक की वैक्सीन नहीं लगने देते थे। ये नक्सली मोबाइल टावर नहीं लगाने देते थे। किस तरह, रेलवे ट्रैक्स को बम लगाकर उड़ाने जैसी घटनाएँ होती थीं। उद्योग धंधों को किस तरह रोका जाता था। आप सबने ये सालों तक देखा है। और इसी का  परिणाम ये होता था कि लाखों गरीब निर्दोष, मेरे नागरिक भाई-बहन, मेरे युवा भाई-बहन अवसरों से वंचित रह जाते थे। उनका जीवन गरीबी के भंवर से निकल ही नहीं पाता था। और इसलिए हमने जब नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई शुरू की, तो साथ ही नक्सल प्रभावित इलाकों के विकास के लिए विशेष अभियान भी चलाये। हमने वामपंथी उग्रवाद से पीड़ित इलाकों में 15 हजार किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बनाईं, सुरक्षा के पूरे प्रबंध करके बनाई। साढ़े नौ हजार से ज्यादा मोबाइल टावर्स इन इलाकों में लगाए गए। आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए करीब पौने दो सौ एकलव्य स्कूल खोले।  युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए करीब 50 ITI खोले। 50 के आसपास Skill Development Centres बनाए। हजारों पोस्ट ऑफिस, बैंक ब्रांच और ATM खोले गए। अति पिछड़े आदिवासी इलाकों के विकास के लिए पीएम जनमन योजना शुरू की।  इससे हजारों सुदूर गाँवों में पहली बार पानी, बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं पहुंची। यही नहीं, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मौका दिया गया। उनके पुनर्वास के लिए योजनाएं बनाई गईं।

साथियों,

‘सबका साथ, सबका विकास’ के इस अभियान ने गरीबी के खिलाफ देश की लड़ाई को नई ऊर्जा और एक नया विश्वास दिया। और इसलिए, आज एक तरफ 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर आए हैं,  दूसरी ओर, देश में नक्सली हिंसा का भी अंत हुआ है। आप बस्तर को ही लीजिये, आज इसी बस्तर में बस्तर ओलंपिक हो रहा है, बच्चे बंदूक नहीं, स्पोर्टस में हाथ आजमा रहे हैं।

साथियों,

इन सफलताओं के बीच हमें एक और बात याद रखनी है, नक्सली खत्म हुए हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। जंगलों से हथियारी नक्सली तो मिट गए, लेकिन दिमागी नक्सलियों ने कई संगठनों पर कब्जा कर रखा है। ये आज भी देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को उकसा रहे हैं। कई राजनीतिक दलों में, अलग-अलग संगठनों में भी इन दिमागी नक्सलियों ने अपनी घुसपैठ कर ली है। हमें इन्हें पहचानना है, इन्हें परास्त करना है और देश को सुरक्षित करना है।

साथियों,

आज की उपलब्धियां हमें प्रेरणा देती हैं, लेकिन ये विराम नहीं हैं। मैं फिर कहता हूं, ये विराम नहीं है। ये जीत, ये सफलताएँ, ये मंच हैं नई उड़ान का, ये उड़ान राष्ट्र के उन सपनों की होगी, जिन्हें सदियों से हमारी पीढ़ियों ने देखा है। ये सपने उन सेनानियों के होंगे, जिन्होंने आज़ादी के लिए अनगिनत बलिदान दिये। ये सपने उन शूरवीर सैनिकों के होंगे, जिन्होंने सीमाओं पर माँ भारती के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग दिया। ये सपने, उन वीर जवानों के होंगे, जिन्होंने नक्सलवाद और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी जिंदगी न्योछावर कर दी। आप हर दिन इस भाव के साथ जीते हैं- तेरा गौरव अमर रहे माँ, तेरा गौरव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें, तेरा गौरव अमर रहे माँ। अब समय है, आपका ये भाव नए विश्वास में बदले, अब समय राष्ट्र के लिए जीने का है, राष्ट्र को नई ऊंचाई पर पहुंचाने का है।

साथियों,

हमारा देश जो संकल्प लेता है, उसे पूरा करने का सामर्थ्य भी उसके पास है। हमने वादा किया था कि हम कश्मीर से धारा 370 हटाएँगे, हमने वो वादा पूरा करके दिखाया। हमने वादा किया था कि हम हर घर में शौचालय बनाएँगे, हमने शौचालय बनाकर दिखाये। हमने वैक्सीनेशन का दायरा बढ़ाने की बात की, हमने उसे पूरा करके दिखाया। इसलिए, आज जब हम गरीबी को दूर करने की बात करते हैं, आज जब हम ड्रग्स फ्री भारत की बात करते हैं, नशा-मुक्त भारत की बात करते हैं, आज जब हम विकसित भारत की बात करते हैं, आज जब हम आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं, तो देश ये लक्ष्य भी हासिल करके रहेगा। हमें अपनी आँखों के सामने इन सपनों को साकार होते देखना है। मुझे आप पर भरोसा है, मुझे मेरे देश की युवाशक्ति पर भरोसा है, मुझे हमारे देशवासियों पर भरोसा है। देश अपने इस लक्ष्य तक जरूर पहुंचेगा। आपके त्याग और परिश्रम विकसित भारत की भव्य इमारत के लिए मजबूत नींव बनेंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर आपको दीपावली की हार्दिक बधाई देता हूँ। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

वंदेमातरम् !

वंदेमातरम् !

वंदेमातरम् !

वंदेमातरम् !

वंदेमातरम् !

वंदेमातरम् !

वंदेमातरम् !

बहुत-बहुत धन्यवाद।

Goa Samachar
Author: Goa Samachar

GOA SAMACHAR (Newspaper in Rajbhasha ) is completely run by a team of woman and exemplifies Atamanirbhar Bharat, Swayampurna Goa and women-led development.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

EDC

और पढ़ें

Majhe Ghar