
पणजी: “डॉक्टोरल डिग्री केवल एक योग्यता नहीं है। यह कुछ नया सीखने, नए विचारों की खोज करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक अवसर है। याद रखें, एक अच्छा रिसर्चर केवल यह नहीं पूछता कि पहले से क्या ज्ञात है। एक अच्छा रिसर्चर यह खोजने की कोशिश करता है कि और क्या किया जा सकता है।”

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, WPU-GOA में डॉक्टोरल प्रोग्राम्स के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर MAEER’s MIT के मैनेजिंग ट्रस्टी और MAEER’s MIT, WPU-GOA तथा MIT वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, डॉ. राहुल वी. कराड भी उपस्थित रहे ।
रिसर्च, इनोवेशन और उच्च स्तरीय स्कॉलरशिप को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, WPU-GOA ने एक समारोह में अपने डॉक्टोरल प्रोग्राम्स की शुरुआत की। इस समारोह में शिक्षा जगत, वैज्ञानिक अनुसंधान, सरकार और उद्योग जगत के कई प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। अन्य विशिष्ट अतिथियों में यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना के प्रेसिडेंट प्रो. सुरेश गरिमेला; DRDO के चेयरमैन डॉ. समीर कामत; WPU-GOA के गवर्निंग बोर्ड के मानद चांसलर और यूनिवर्सिटी एट बफ़ेलो के प्रेसिडेंट एमेरिटस प्रो. सतीश त्रिपाठी; तथा राज्यसभा के माननीय सदस्य श्री सदानंद शेट तनावड़े शामिल थे।
गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा: “मैं चाहता हूं कि हमारा राज्य एक बार फिर अपने शैक्षणिक संस्थानों, रिसर्च और इनोवेशन के लिए पहचाना जाए। मैं स्कॉलर्स से आग्रह करता हूं कि वे गोवा को ही अपनी प्रयोगशाला बनाएं। हमारे तट, नदियां और पश्चिमी घाट की जैव विविधता… हमारी भाषा, संस्कृति और कोंकणी तथा गोवा की परंपराओं की हमारी जीवंत विरासत।

WPU गोवा के पास राज्य के उच्च शिक्षा परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने और रिसर्च तथा इनोवेशन को बढ़ाने के राष्ट्रीय प्रयासों में योगदान देने का अवसर है।”

डॉक्टोरल प्रोग्राम्स की यह शुरुआत, रिसर्च स्कॉलर्स को तैयार करने, विभिन्न विषयों के बीच शोध को प्रोत्साहित करने और उच्च स्तरीय शैक्षणिक जुड़ाव के अवसर पैदा करने के WPU-GOA के विजन को दर्शाती है। अपने डॉक्टोरल कार्यक्रमों के माध्यम से, विश्वविद्यालय का उद्देश्य गहन शोध, आलोचनात्मक सोच और नवाचार के लिए एक मंच प्रदान करना है। साथ ही, यह विद्वानों को समकालीन चुनौतियों के समाधान खोजने और अपने-अपने क्षेत्रों में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर कामत ने अपने विचार साझा करते हुए कहा:
“आज समाज के सामने मौजूद समस्याओं को केवल एक क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले लोग हल नहीं कर सकते। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए आपको अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की टीमें बनानी होंगी।”

WPU-गोवा के गवर्निंग बोर्ड के मानद चांसलर और यूनिवर्सिटी एट बफ़ेलो के प्रेसिडेंट एमेरिटस, प्रो. सतीश त्रिपाठी ने कहा:
“प्रकृति ऐसी कोई समस्या पैदा नहीं करती जिसे केवल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, पर्यावरणविद या कंप्यूटर वैज्ञानिक ही हल कर सकें। वास्तविक समस्याओं का समाधान कई विषयों को एक साथ मिलाकर (ट्रांसडिसिप्लिनरी तरीके से) किया जाता है।”
MAEER के MIT के मैनेजिंग ट्रस्टी और MAEER के MIT, WPU-गोवा तथा MIT वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, डॉ. राहुल वी. कराड ने कहा:
“किसी भी विश्वविद्यालय की नींव इस बात पर टिकी होती है कि वह समाज की समस्याओं की पहचान कैसे और किस तरह से करता है। विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाली मशीन नहीं हैं। किसी भी राष्ट्र या समाज की प्रगति के लिए शिक्षा प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण है। निजी संस्थानों के बीच भी प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, लेकिन यह प्रतिस्पर्धा एक-दूसरे से सीखने और सहयोग करने वाली होनी चाहिए।”
इस कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना के प्रेसिडेंट प्रो. सुरेश गरिमेला और राज्यसभा के माननीय सदस्य श्री सदानंद शेट तनवड़े ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने वैश्विक उच्च शिक्षा, शोध और संस्थागत सहयोग पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। उनकी भागीदारी ने शोध में उत्कृष्टता लाने और ज्ञान को सार्थक परिणामों में बदलने के लिए मजबूत शैक्षणिक और संस्थागत साझेदारियों के महत्व को रेखांकित किया। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना के अध्यक्ष, प्रो. सुरेश गरिमेला ने कहा:
“मुझे इस बात का गर्व है कि मैं राहुल कराड द्वारा शुरू किए गए इस भव्य, नवाचारी और, मेरी नज़र में, बेहद सफल प्रयोग का हिस्सा बना हूँ। गोवा में स्थित ‘वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी’, अपने ट्रांसडिसिप्लिनरी (बहु-विषयक) दृष्टिकोण के कारण काफी अनूठी है – यह दुनिया में अपने आप में एक मिसाल है।”
राज्यसभा सांसद, सदानंद शेट तनावडे ने कहा- “गोवा भारत के सबसे अधिक साक्षर राज्यों में से एक है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में हमारा सफर सिर्फ साक्षरता और डिग्रियों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। हमें नवाचार, शोध और वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने की क्षमता को भी बढ़ावा देना चाहिए।”
इस समारोह का एक मुख्य आकर्षण WTC और WPU-गोवा के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होना था। यह समझौता संस्थागत जुड़ाव को मजबूत करने और आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशने की दिशा में एक कदम है।
इस कार्यक्रम में वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पाँच असाधारण वैज्ञानिकों/शोधकर्ताओं को ‘डॉ. माशेलकर पुरस्कार’ देकर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों के माध्यम से शोधकर्ताओं के योगदान को मान्यता दी गई और वैज्ञानिक खोज, नवाचार तथा सार्थक प्रभाव डालने वाले शोध के महत्व को रेखांकित किया गया।
Author: Goa Samachar
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