
“टेक्सटाइल भारत का सिर्फ एक सेक्टर नहीं है | ये हमारी सांस्कृतिक विविधता की मिसाल है | आज टेक्सटाइल और अपैरल मार्किट बहुत तेजी से बढ़ रहा है, और इस विकास की सबसे सुंदर बात यह है की गावों की महिलाएं, शहरों के डिज़ाइनर , बुजुर्ग बुनकर और Start-Up शुरू करने वाले हमारे युवा सब मिलकर इसे आगे बढ़ा रहे हैं | आज भारत में 3000 से ज्यादा Textile Start-Up सक्रिय हैं | कई Start-Ups ने भारत की हैंडलूम पहचान को ग्लोबल हाइट दी है | साथियो, 2047 के विकसित भारत का रास्ता आत्मनिर्भरता से होकर गुजरता है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सबसे बड़ा आधार है – ‘vocal for Local’ | जो चीजें भारत में बनी हों, जिसे बनाने में किसी भारतीय का पसीना बहा हो, वही खरीदें और वही बेचें | ये हमारा संकल्प होना चाहिए |” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में हैंडलूम को लेकर अपनी बात रखी।

भारत की सांस्कृतिक पहचान में हथकरघा का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। यह केवल एक कपड़ा बुनने की कला नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही परंपरा, मेहनत, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इसी महत्व को सम्मान देने के लिए हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है।
पणजी : ARA की संस्थापक सदस्य आशा अरनोदेकर, राहिला खान और आशा वेरनेकर ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को खास अंदाज में मनाने के लिए एक शानदार फैशन शो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं ने भाग लिया और हथकरघा की महत्ता पर चर्चा की। फैशन शो की खास बात यह रही कि इसमें हैंडलूम परिधानों में पुरुष मॉडल भी रैम्प पर उतरे।
पणजी के खूबसूरत ‘द हेरिटेज बिस्त्रो’ में आयोजित इस समारोह में गोवा की अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त फैशन डिजाइनर वर्मा डिमेलो की मौजूदगी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी। इस अवसर पर सकला डेबरास, रुचिका डाबर, तेजश्री पाई सहित कई हस्तियां भी उपस्थित रहीं।
अतिथियों का धन्यवाद करते हुए आशा वेरनेकर ने कहा, “हमारे सभी दोस्तों और हथकरघा प्रेमियों का दिल से आभार, आपने इस कार्यक्रम को जीवन्त बना दिया। आपकी कहानियां इतनी रोचक थीं कि मन कर रहा था बस सुनते ही रहें। यह तो बस शुरुआत है, अब यह सफर इतनी जल्दी थमने वाला नहीं।”
सेलिब्रिटी शेफ सरिता ने कहा -“यह कार्यक्रम वाकई खास रहा , और मैं इसका हिस्सा बनकर बहुत खुश हूँ। आपकी रचनात्मकता और शानदार हथकरघा परिधानों में सजे सभी लोगों को एक साथ लाने के आपके प्रयास ने इस शाम को सचमुच अविस्मरणीय बना दिया।”
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस परंपरा, आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने की प्रेरणा देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है। 7 अगस्त 1905 को बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और भारतीय हस्तशिल्प एवं वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहित करना था।

इस ऐतिहासिक दिन की याद में भारत सरकार ने वर्ष 2015 से इस दिवस को मनाने की घोषणा की। पहला समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में चेन्नई, तमिलनाडु में आयोजित किया गया।

हथकरघा क्षेत्र न केवल हमारे पारंपरिक शिल्प का संवाहक है, बल्कि यह लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका का साधन भी है। यह उद्योग पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ है। बुनकरों के हाथों से बने कपड़े भारतीय संस्कृति, रीति-रिवाज और स्थानीय पहचान को दर्शाते हैं। हथकरघा स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूत करता है।
आधुनिक मशीनों और सस्ते आयातित कपड़ों की चुनौती के बीच हथकरघा उद्योग को बाजार, तकनीक और डिज़ाइन के स्तर पर नई ऊर्जा की जरूरत है। सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर बुनकरों को डिजिटल मार्केटिंग, नए डिज़ाइन प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दे रहे हैं।

गोवा का पारंपरिक परिधान कुनबी साड़ी हथकरघा कला का एक अनमोल उदाहरण है। लाल और सफेद चेक पैटर्न वाली यह साड़ी सदियों से गोवा की कुनबी जनजाति की पहचान रही है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर ऐसे पारंपरिक परिधानों को पुनर्जीवित करना और नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाना बेहद जरूरी है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस यह याद दिलाता है कि हथकरघा केवल कपड़ा नहीं, बल्कि संस्कृति, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की बुनावट है। यदि हम स्थानीय उत्पाद खरीदेंगे, पहनेंगे और प्रमोट करेंगे, तो न केवल बुनकरों का जीवन बेहतर होगा, बल्कि हमारी परंपराएं भी सुरक्षित रहेंगी।

स्मिता पाटिल, निमिषा सारस्वत , नेहा नाइक , समीक्षा कर्मकार हरजी, सिम्मी कुमार ,लतिका गुगलानी , रितू पूरी, एलिज़ाबेथ कुरियन ,सोहिनी बासु सहित कई महिलाओं ने अपनी उपस्थिति से इस आयोजन को सफल बना दिया। इस विशेष आयोजन के सूत्रधार की ज़िम्मेदारी सुनीता माथुर पर थी , जिन्होंने इसे बखूबी निभाया।

भारत में हथकरघा उद्योग में महिलाओं की एक बड़ी संख्या कार्यरत है। चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना (2019-20) के अनुसार, कुल 35.22 लाख हथकरघा श्रमिकों में से 25.46 लाख महिलाएँ हैं, जो कुल कार्यबल का 72.29% है। यह दर्शाता है कि हथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की प्रमुख भूमिका है।

Author: Goa Samachar
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